जैसा कि हमनें ऊपर बताया सभी बैंक नोट तथा सिक्के वैधानिक मुद्रा हैं, जिन्हें स्वीकार करना किसी व्यक्ति के लिए बाध्यकारी होता है। किन्तु सिक्कों की स्थिति में इसकी एक निश्चित सीमा तय की गई है, जो कि न्यूनतम 1 रुपये तथा अधिकतम 1000 रुपये है। दूसरे शब्दों में कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के भुगतान के रूप में 1,000 रुपयों से अधिक मूल्य के सिक्के लेने से इनकार कर सकता है।

विदेशी मुद्रा व्यापार कैसे काम करता है

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विदेशी मुद्रा व्यापार क्या है, और यह कैसे काम करता है?

सबसे पहले, यह समझना जरूरी है कि विदेशी मुद्रा बाजार क्या है। विदेशी मुद्रा या विदेशी मुद्रा बाजार वह जगह है जहां एक मुद्रा का दूसरे के लिए कारोबार किया जाता है। यह दुनिया के सबसे सक्रिय रूप से कारोबार किए गए वित्तीय बाजारों में से एक है। वॉल्यूम इतने विशाल हैं कि वे दुनिया भर के शेयर बाजारों में सभी संयुक्त लेनदेन से अधिक हैं।

विदेशी मुद्रा बाजार की एक वैश्विक पहुंच है जहां दुनिया भर से खरीदार और विक्रेता व्यापार के लिए एक साथ आते हैं। ये व्यापारी एक दूसरे के बीच सहमत मूल्य पर धन का आदान प्रदान करते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्ति, कॉर्पोरेट और देशों के केंद्रीय बैंक एक मुद्रा का दूसरे में आदान-प्रदान करते हैं। जब हम विदेश यात्रा करते हैं, तो हम सभी विदेशी देश की कुछ मुद्रा खरीदते हैं। यह अनिवार्य रूप से एक विदेशी मुद्रा लेनदेन है।

इसी तरह, कंपनियों को अन्य देशों में वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने की आवश्यकता होती है और इसके लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होगी। मान लें कि भारत में एक कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका से उत्पाद खरीद रही है। भारतीय कंपनी को उत्पादों के आपूर्तिकर्ता का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि कंपनी को खरीद करने के लिए जिस डॉलर की जरूरत है उसके बराबर रुपये का आदान-प्रदान करना होगा। विदेशी मुद्रा व्यापार कैसे काम करता है?

अब जब हमने विदेशी मुद्रा व्यापार की मूल बातें समझ ली हैं, तो हम देखेंगे कि यह मुद्रा क्या है और इसके कार्य क्या‌ है इतने बड़े पैमाने पर क्यों किया जाता है। मुख्य कारण अटकलें हैं: मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन से लाभ कमाने के लिए विदेशी मुद्रा व्यापार किया जाता है। विभिन्न आर्थिक और राजनीतिक कारकों के कारण मुद्रा मूल्य बदलते रहते हैं, जिनमें भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति और ब्याज दर में परिवर्तन शामिल हैं। ये मूल्य परिवर्तन उन व्यापारियों के लिए आकर्षक बनाते हैं, जो अपने हंच सही होने से लाभ की उम्मीद करते हैं। हालांकि, अधिक लाभ की संभावना के साथ, उच्च जोखिम आता है।

शेयरों की तरह, विदेशी मुद्रा व्यापार के लिए कोई केंद्रीय बाजार नहीं है। दुनिया भर के व्यापारियों के बीच कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग करके लेन-देन होता है। मुद्राओं का कारोबार न्यू यॉर्क, टोक्यो, लंदन, हांगकांग, सिंगापुर, पेरिस, आदि जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों में किया जाता है। इसलिए जब एक बाजार बंद हो जाता है, तो दूसरा खुलता है। यही कारण है कि विदेशी मुद्रा बाजार दिन या रात के लगभग किसी भी समय सक्रिय रहते हैं।

मुद्रा व्यापार की मूल बातों के पहलुओं में से एक यह है कि यह जोड़े में होता है – एक मुद्रा की कीमत की तुलना दूसरे के साथ की जाती है। मूल्य उद्धरण में प्रकट होने वाले पहले को आधार मुद्रा के रूप में जाना जाता है, और दूसरे को उद्धरण मुद्रा कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यू एस डॉलर / भारतीय रुपया जोड़ी व्यापारी को यह जानकारी देती है कि एक अमेरिकी डॉलर (मूल मुद्रा) खरीदने के लिए कितने भारतीय रुपए की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट तिथि पर जोड़ी यू एस डॉलर 1/ भारतीय रुपया 67.5 रुपये हो सकती है। आधार मुद्रा को हमेशा एक इकाई के रूप में व्यक्त किया जाता है।विदेशी मुद्रा व्यापार में कोई भी मुद्रा आधार मुद्रा हो सकती है।

विदेशी मुद्रा व्यापार कैसे करें?

अब जब आप जानते हैं कि विदेशी मुद्रा व्यापार कैसे काम करता है, तो मुद्रा व्यापार करने के लिए तीन अलग-अलग प्रकार के विदेशी मुद्रा बाजारों को समझना आवश्यक है।

स्पॉट मार्केट:

यह एक मुद्रा जोड़ी के भौतिक आदान-प्रदान को संदर्भित करता है। एक स्पॉट लेनदेन एक ही बिंदु पर होता है – व्यापार को ‘स्पॉट’ पर बसाया जाता है। ट्रेडिंग एक संक्षिप्त अवधि के दौरान होता है। मौजूदा बाजार में, मुद्राएं मौजूदा कीमत पर खरीदी और बेची जाती है। किसी भी अन्य वस्तु की तरह, मुद्रा की कीमत आपूर्ति और मांग पर आधारित होती है। मुद्रा दरें अन्य कारकों से भी प्रभावित होती हैं जैसे ब्याज दरों, अर्थव्यवस्था की स्थिति, राजनीतिक स्थिति, दूसरों के बीच अन्य। एक स्पॉट सौदे में, एक पार्टी किसी अन्य पार्टी को एक विशेष मुद्रा की एक निश्चित राशि प्रदान करती है। बदले में, यह एक सहमत मुद्रा विनिमय दर पर दूसरी पार्टी से एक और मुद्रा की एक सहमत राशि प्राप्त करता है।

फिर फॉरवर्ड विदेशी मुद्रा बाजार और वायदा विदेशी मुद्रा बाजार हैं। इन दोनों बाजारों में, मुद्राएं तुरंत हाथ नहीं बदलती हैं। इसके बजाय, एक निश्चित अंतिम तिथि पर एक विशिष्ट मूल्य पर, मुद्रा की एक निश्चित मात्रा के लिए अनुबंध हैं।

फॉरवर्ड्स मार्केट:

फॉरवर्ड फॉरेक्स मार्केट में, दो पार्टियां किसी निश्चित तिथि पर किसी निश्चित मूल्य पर किसी मुद्रा की एक निश्चित मात्रा में खरीदने या बेचने के लिए अनुबंध में प्रवेश करती हैं।

मुद्रा वायदा भविष्य की तारीख में निश्चित मूल्य पर किसी विशेष मुद्रा को खरीदने या बेचने के लिए अनुबंध हैं। इस तरह के अनुबंधों का एक मानक आकार और अंतिम अवधि है और सार्वजनिक एक्सचेंजों पर कारोबार किया जाता है। भारत में विदेशी मुद्रा व्यापार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। एक्सचेंजों द्वारा निकासी और निपटान का ध्यान रखा जाता है।

विदेशी मुद्रा व्यापार भारत में कैसे करें:

अब जब हमने मुद्रा व्यापार की मूल बातें देखी हैं, तो हम भारत में मुद्रा व्यापार करने के तरीके के बारे में और बात करेंगे।

भारत में, बीएसई और एनएसई मुद्रा वायदा और विकल्पों में व्यापार करने की पेशकश करते हैं। यू एस डॉलर /भारतीय रुपया सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा जोड़ी है। हालांकि, जब मुद्रा व्यापार की बात आती है तो अन्य अनुबंध भी लोकप्रिय हो रहे हैं। यदि आप एक व्यापारी जो मुद्रा बदलावों पर एक स्थान लेना चाहता है, तो आप मुद्रा वायदा में व्यापार कर सकते हैं। मान लीजिए कि आप उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी डॉलर जल्द ही भारतीय रुपए मुकाबले बढ़ जाएगा । आप तो अमरीकी डालर/ भारतीय रुपया वायदा खरीद सकते हैं। दूसरी ओर, यदि आप उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले INR मजबूत होगा, तो आप यू एस डॉलर /भारतीय रुपया वायदा बेच सकते हैं।

हालांकि, यह समझने की जरूरत है कि विदेशी मुद्रा व्यापार हर किसी के लिए नहीं है। यह उच्च स्तर के जोखिम के साथ आता है। विदेशी मुद्रा में व्यापार करने से पहले, अपने जोखिम की भूख को जानना आवश्यक है और इसमें आवश्यक स्तर का ज्ञान और अनुभव भी होना चाहिए। विदेशी मुद्रा में व्यापार करते समय, आपको पता होना चाहिए कि कम से कम शुरुआत में पैसे खोने का एक अच्छा डर बना रहता है।

मुद्रा तथा इसके विभिन्न प्रकार (Types of money in Hindi)

Types of money in Hindi

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे अनेक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। इस लेख के माध्यम से हम समझेंगे मुद्रा तथा इसके प्रकारों (Types of money in Hindi) के बारे में।

मुद्रा क्या है?

धन या मुद्रा किसी भी अर्थव्यवस्था का केंद्र होती है। मुद्रा का प्रयोग ऋण चुकाने अथवा अर्थव्यवस्था में विनिमय के साधन के रूप में किया जाता है, जिसके माध्यम से आप किसी भी वस्तु या सेवा को खरीद सकते हैं। मुद्रा के इतिहास की बात करें तो प्रचीन काल में वस्तुओं का प्रयोग विनिमय के साधन के रूप में किया जाता था, जिसमें किसी एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु का विनिमय होता था और यह व्यवस्था बार्टर सिस्टम कहलाती थी।

तत्पश्चात वस्तुओं के स्थान पर कीमती धातुओं जैसे सोना, चांदी आदि को मुद्रा या विनिमय का साधन बनाया गया एवं औद्योगिकरण के बाद से विश्वभर में कागज़ की मुद्रा प्रचलन में आई जिसका प्रयोग हम वर्तमान में करते हैं।

मुद्रा के प्रकार (Types of money in Hindi)

प्रकारों की बात करें तो मुद्रा अनेक प्रकार की होती है जिनमे से कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं।

  • वास्तविक मुद्रा
  • वैधानिक मुद्रा
  • साख या ऐच्छिक मुद्रा
  • सांकेतिक मुद्रा
  • प्रामाणिक मुद्रा
  • गर्म मुद्रा
  • प्लास्टिक मुद्रा

वास्तविक मुद्रा

यह मुद्रा का वह प्रकार है, जिसका प्रयोग दैनिक जीवन में लेन देन, किसी उत्पाद या सेवा की कीमत या कर्ज़ की मात्रा प्रकट करने के लिए किया जाता है। जैसे भारत में रुपया, अमेरिका में डॉलर, ब्रिटेन में पाउंड इत्यादि।

वैधानिक मुद्रा

ऐसी मुद्रा, जिसे सरकार द्वारा जारी किया जाता है वैधानिक मुद्रा कहलाती है, इसे स्वीकार करना प्रत्येक व्यक्ति की बाध्यता होती है दूसरे शब्दों में कोई ऋणदाता या व्यक्ति अपने भुगतान के लिए वैधानिक मुद्रा को लेने से इंकार नहीं कर सकता। वैधानिक मुद्रा को अस्वीकार करना दंडनीय अपराध होता है। भारत में सरकार तथा केंद्रीय बैंक द्वारा जारी सभी नोट एवं सिक्के वैधानिक मुद्रा है। किसी भी देश की मुद्रा वैधानिक मुद्रा ही होती है।

जैसा कि हमनें ऊपर बताया सभी बैंक नोट तथा सिक्के वैधानिक मुद्रा हैं, जिन्हें स्वीकार करना किसी व्यक्ति के लिए बाध्यकारी होता है। किन्तु सिक्कों की स्थिति में इसकी एक निश्चित सीमा तय की गई है, जो कि न्यूनतम 1 रुपये तथा अधिकतम 1000 रुपये है। दूसरे शब्दों में कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के भुगतान के रूप में 1,000 रुपयों से अधिक मूल्य के सिक्के लेने से इनकार कर सकता है।

ऐच्छिक मुद्रा

वैधानिक मुद्रा के विपरीत ऐसी मुद्रा जिसे स्वीकार करना अथवा न करना व्यक्ति या ऋणदाता पर निर्भर करता है ऐच्छिक मुद्रा कहलाती है। ऐसी मुद्रा को स्वीकार करने के लिए व्यक्ति बाध्य नहीं होता अतः वह अपने भुगतान के रूप में ऐसी मुद्रा को लेने से अस्वीकार कर सकता है। बैंक चैक इस मुद्रा का उदाहरण है अर्थात कोई व्यक्ति भुगतान के रूप में चैक को अस्वीकार कर सकता है किंतु किसी बैंक नोट को स्वीकार करने के लिए वह बाध्य है।

सांकेतिक मुद्रा

ऐसी मुद्रा जिसका मूल्य उसमें अंकित मूल्य से कम होती है सांकेतिक मुद्रा कहलाती है। उदाहरण के तौर पर यदि 1 रुपये के सिक्के की बात करें तो उसमें प्रयोग की गई धातु का मूल्य असल मे 1 रुपये से कम होता है। इस प्रकार भारत सरकार द्वारा जारी सभी सिक्के सांकेतिक मुद्रा होती हैं अर्थात सभी सिक्कों में प्रयुक्त धातु का मूल्य सिक्कों में अंकित मूल्य से कम होता है।

प्रामाणिक मुद्रा

सांकेतिक मुद्रा के विपरीत ऐसी मुद्रा में अंकित मूल्य मुद्रा के धातु के मूल्य के बराबर होता है। सोने एवं चांदी के सिक्के इसके उदाहरण हैं।

प्लास्टिक मुद्रा

डिजिटलीकरण के दौर में मुद्रा का यह प्रकार काफी प्रचलन में है। इसके अंतर्गत बैंकों द्वारा जारी डेबिट कार्ड तथा क्रेडिट कार्ड शामिल हैं, जिनकी मदद से आप ऑनलाइन खरीददारी, POS मशीन द्वारा दुकानों, रेस्त्रां तथा होटलों आदि में भुगतान, बिलों का भुगतान, पैसों का लेन देन जैसे अनेकों कार्य बिना नगदी के कर सकते हैं। जहाँ डेबिट कार्ड (ATM Card) का आप केवल अपने बैंक खाते में उपलब्ध राशि तक ही उपयोग कर सकते हैं वहीं क्रेडिट कार्ड आपको बैंक खाते में उपलब्ध राशि से अधिक अर्थात कर्ज़ लेने की सुविधा भी देता है।

गर्म मुद्रा

ऐसी मुद्रा जिसके वित्तीय बाजार से पलायन की संभावनाएं बहुत अधिक होती हैं गर्म मुद्रा कही जाती है। यह मुद्रा जिस क्षेत्र में लाभ की संभावनाएं अधिक हो वहाँ स्थान्तरित हो जाती है। शेयर बाजार में लगी विदेशी मुद्रा इसका उदाहरण है।

यह भी पढ़ें : भारतीय रिजर्व बैंक तथा इसके कार्य

उम्मीद है दोस्तो आपको ये लेख (Types of money in Hindi) पसंद आया होगा टिप्पणी कर अपने सुझाव अवश्य दें। अगर आप भविष्य में ऐसे ही अलग अलग क्षेत्रों के मनोरंजक तथा जानकारी युक्त विषयों के बारे में पढ़ते रहना चाहते हैं तो हमें सोशियल मीडिया में फॉलो करें तथा हमारा न्यूज़लैटर सब्सक्राइब करें। तथा इस लेख को सोशियल मीडिया मंचों पर अपने मित्रों, सम्बन्धियों के साथ साझा करना न भूलें।

मुद्रा किसे कहते है

मुद्रा किसे कहते है आर्थिक प्रणाली में मुद्रा का केवल एक मौलिक कार्य है – वस्तुओ तथा सेवाओं के लेन – देन को सरल बनाना । जी हाँ दोस्तों आज के पोस्ट में हम बात करने वाले है मुद्रा किसे कहते है क्या रोल होता है हमारे जीवल में मुद्रा का मुद्रा प्रचलन आज से नहीं बल्कि हर युग होते रहा है । चाहे प्राचीन कल हो या मध्य कल हो या फिर आज का आधुनिक कल हो ऐ हमेसा से प्रचलन में चलते आरा रहा है । वस विनिमय का तरीका अलग था ।

मुद्रा किसे कहते है

मुद्रा ने समाज में विभिन्न प्रकार के कार्य करके आर्थिक विकाश को सम्भव बनाया है । आर्थिक प्रणाली में मुद्रा का केवल एक मौलिक कार्य है – वस्तुओ तथा सेवाओं के लेन – देन को सरल बनाना इसमें बैंको का विशेष योगदान होता है , साथ ही वित्तीय संस्थान समाज में मुद्रा के सहविभाजन में पूर्ण सहयोग प्रदान करते है ।

मुद्रा

मुद्रा की उत्पत्ति विनिमय के माध्यम के रूप में हुई है। अतः वस्तु जो विनिमय के माध्यम का कार्य करती है, वह मुद्रा कहलाती है अर्थात् मुद्रा (Currency) वह वस्तु है, जो सभी प्रकार के लेन-देन में भुगतान के माध्यम के रूप में प्रयुक्त होती है अर्थात् यह एक शक्तिशाली वस्तु है, जो भुगतान के माध्यम के रूप में पूर्णतया स्वीकृत है।

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मुद्रा का निर्गमन केन्द्रीय बैंक व सरकार द्वारा किया जाता है। मुद्रा का अभिप्राय मात्र नोटों व सिक्कों से न होकर उन सभी वस्तुओं से हैं, जो भुगतान के रूप में सामान्यतः स्वीकार की जाती हैं।

मुद्रा के दो प्रकार होते है

1. वैधानिक मुद्रा (Legal Currency) वह मुद्रा है, जिसका निर्गमन सरकार या रिजर्व बैंक द्वारा एक विधान के अन्तर्गत किया जाता है, जिसमें रिजर्व बैंक धारक को उतनी रकम अदा करने का वचन देता है।

2. साख मुद्रा (Credit Currency) वह मुद्रा है, जिसका भुगतान चेकों के माध्यम से होता है।

मुद्रा की तरलता

मुद्रा की तरलता (Liquidity of Currency) से आशय मुद्रा की किसी वस्तु में परिवर्तनीयता से है अर्थात् मुद्रा में किया गया भुगतान बिना किसी क्षति के वस्तु या सेवा में परिवर्तित हो जाता है। दूसरे शब्दों में, मुद्रा वह माध्यम है, जो बिना किसी मूल्य ह्रास के किसी भी वस्तु का स्वरूप धारण कर सकती है।

मुद्रा की पूर्ति

मुद्रा की पूर्ति एक स्टॉक अवधारणा है। इससे अभिप्राय एक निश्चित समय पर देश के लोगों के पास कुल मुद्रा (सभी प्रकार की) के स्टॉक से है। दूसरे शब्दों में मुद्रा की पूर्ति का अर्थ जनता के पास अथवा मुद्रा की माँग करने वालों के पास मुद्रा का स्टॉक है।

सामान्य अर्थ में मुद्रा की पूर्ति से (Supply of Money) आशय मुद्रा के उस आकार से है, जो देश के लोगों के पास होता है। इसमें सरकार या बैंकों के पास जो मुद्रा करते, लेकिन होती है, उसको शामिल मुद्रा की वास्तविक पूर्ति ज्ञात करने के लिए चैडलर द्वारा प्रतिपादित तुलना पत्र दृष्टिकोण का प्रयोग किया जाता है। इसके अनुसार, की पूर्ति (S)= मुद्रा दायित्वा ।

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मुद्रा की पूर्ति पर विचार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 1961 में प्रथम वर्ष 1977 में दूसरा कार्यकारी समूह गठित किया, जिसने तरलता के माप के आधार पर मुद्रा को चार वर्गों में बाटा गया है

NOTE – विशेष जानने के लिए आप विकिपीडिया भी USE कर सकते है निचे इसका लिंक है ।

https://hi.wikipedia.org/

1. M1 जनता के पास मुद्रा (करेन्सी नोट तथा सिक्के) + बैंकों की माँग जमाएँ (चालू और बचत खातों पर) + रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाएँ।

2. M2 = M1 + डाकघरों की बचत व बैंक जमाएँ।

3. M3 = M1 + व्यापारिक बैंकों की निवल सावधि जमाएँ। (M3) = जनता के पास चलन + बैंको की चालू एवं बचत जमाएँ + बैंकों क सावधि जमाएँ + रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाएँ।

4. M4 = M3 + डाकघर की कुल जमा राशि (NSC छोड़कर)

उपरोक्त चारों संघटकों में M1 सबसे अधिक तरलता (Liquidity) को प्रदर्शित करता है तथा यह तरलता क्रमशः घटती जाती है और अन्तिम संघटक M4 सबसे कम तरलता पाई जाती है।

  • उपरोक्त माप के साथ ही रिजर्व बैंक ने तरलता मिश्रण की नई अवधारणा को अलग से मौद्रिक समीकरणों के नए तरीकों में, परिभाषित किया है। तरलता मिश्रणों की गणना निम्न प्रकार की जाती हैं L = नई Mg + डाकघर बचत बैंक के पास सभी जमाएँ (राष्ट्रीय बचत पत्र को छोड़कर)
  • L = L + सावधि वित्तीय एवं पुनर्वित्त संस्थाओं के पास सावधि जमाएँ L = L + गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनियों (NBFCs) के पास जनता की जमाएँ ।

इन्हे भी पढ़े

मुद्रा समय की मांग है जो हमेसा परिवर्तित होती है जनरेशन to जनरेशन । आजके पोस्ट में हमने जाना मुद्रा क्या होता है । हमारी ऐ पोस्ट आपसभी को अच्छी गी तो ऐसे शेयर जरूर करे अपने दोस्तों के साथ । तो मिलते हो अगले पोस्ट में ।

मुद्रा के प्रमुख लक्षण क्या है?

इसे सुनेंरोकेंमुद्रा एक ऐसा मूल्यवान रिकॉर्ड है या आमतौर पर वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान के रूप में स्वीकार किया जाने वाला तथ्य है. यह सामाजिक-आर्थिक संदर्भ के अनुसार ऋण के पुनर्भुगतान के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है लेनदेन को सुविधाजनक बनाना.

मुद्रा के कितने प्रकार होते हैं?

मुद्रा के प्रकार (मुद्रा का वर्गीकरण) निम्न रुप में है:

  • वास्तविक मुद्रा एवं लेखे की मुद्रा
  • पूर्ण एवं प्रतिनिधि मुद्रा
  • विधि-ग्राह्य मुद्रा एवं ऐच्छिक मुद्रा
  • धातु मुद्रा एवं पत्र-मुद्रा

डमी मुद्रा क्या होती है?

इसे सुनेंरोकेंइस सिस्टम के लागू होने के बाद किसी शख्स को बिजली, पानी सप्लाई करने वाली निजी कंपनियों, बैंक और आधार से जुड़े पेमेंट सिस्टम के तहत एक बैंक खाते से दूसरे में फंड ट्रांसफर करते वक्त या एटीएम से पैसा निकालते वक्त डमी यानी नकली नंबर शेयर करना होगा, न कि असली आधार नंबर. यह डमी नंबर सरकार की तरफ से दिया जाएगा.

मुद्रा का समय मूल्य क्या है?

इसे सुनेंरोकेंमुद्रा के समय मूल्य की अवधारणा से आशय, यदि किसी व्यक्ति को वर्तमान में 50,000 रूपये लेने अथवा भविष्य में दो वर्ष पश्चात 50,000 रूपये स्वीकार करने का विकल्प प्रस्तुत किया जाता है, तो वह भविष्य की तुलना में वर्तमान में 50,000 रूपये स्वीकार करने को वरियता प्रदान करेगा।

मुद्रा के विकास की प्रथम अवस्था क्या है?

इसे सुनेंरोकें1. प्रथम अवस्था : वस्तु मुद्रा (Commodity Money)- प्रारम्भ काल में वस्तु मुद्रा का प्रचलन था। किन्तु किसी स्थान में कौन-सी वस्तु को मुद्रा का रूप दिया गया, यह आर्थिक विकास की अवस्था, सांस्कृतिक अवस्था, जलवायु, स्थान आदि पर निर्भर था।

मुद्रा के कितने कार्य होते हैं?

इसे सुनेंरोकेंमुद्रा को उस वस्तु के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे विनिमय के माध्यम के रूप में समाज द्वारा सामान्य रूप से स्वीकार किया जाय, जो लेखे की इकाई के रूप में कार्य कर सकती है, क्रय शक्ति का संचय कर सकती है और जिसे ऋण चुकाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है ।

मुद्रा का प्राथमिक कार्य कौन सा है?

इसे सुनेंरोकें(ख) मूल्य का संचय (ग) भुगतान का आधार (घ) मूल्य का हस्तान्तरण

मुद्रा के लिए मापन का आधार होना क्यों जरूरी है?`?

इसे सुनेंरोकेंमुद्रा का मापन निवल शब्द से बैंक के द्वारा रखी गयी लोगों की जमा का ही बोध होता है और इसलिए यह मुद्रा की पूर्ति में शामिल हैं। अंतर बैंक जमा, जो एक व्यावसायिक बैंक दूसरे व्यावसायिक बैंक में रखते हैं, को मुद्रा की पूर्ति के भाग के रूप में नहीं जाना जाता है।

मुद्रा की मांग क्यों की जाती है?

इसे सुनेंरोकेंयह तब होता है जब खरीद वांछित हो और जब कारक भुगतान (जैसे मजदूरी) किए जाते हैं, के बीच समय में सिंक्रनाइज़ेशन की कमी के कारण होता है। दूसरे शब्दों में, जबकि श्रमिकों को महीने में केवल एक बार भुगतान किया जा सकता है, वे आम तौर पर खरीदारी करने की इच्छा करेंगे, और इसलिए पूरे महीने के दौरान उन्हें पैसे की आवश्यकता होगी।

समय मूल्य से आप क्या समझते हैं?

इसे सुनेंरोकेंपैसे का समय मूल्य – टीवीएम पैसे का समय मूल्य (टीवीएम) यह अवधारणा है कि वर्तमान समय में उपलब्ध धन की संभावित कमाई क्षमता के कारण भविष्य में समान राशि से अधिक मूल्य है। वित्त का यह मूल सिद्धांत यह मानता है कि, बशर्ते पैसा ब्याज अर्जित कर सकता है, कोई भी राशि जितनी जल्दी प्राप्त होती है, उतनी ही अधिक मूल्य मुद्रा क्या है और इसके कार्य क्या‌ है की होती है।

मुद्रा विकास का सही क्रम क्या है?

इसे सुनेंरोकेंमुद्रा में सामान्य स्वीकृति के गुण का होना बहुत जरूरी है यदि किसी वस्तु में सामान्य स्वीकार होने की विशेषता नहीं है तो उस ‘वस्तु’ को मुद्रा नहीं कहा जा सकता। इस प्रकार, मुद्रा से अभिप्राय कोई भी वह वस्तु है जो सामान्य रुप से विनियम के माध्यम, मूल्य के माप, धन के संचय तथा ऋणों के भुगतान के रुप में स्वीकार की जा सकती है।

अमेरिका ने भारत को मुद्रा निगरानी सूची से हटाया, चीन को झटका; जानिए क्या हैं इसके मायने

अमेरिका की वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने अपनी भारत यात्रा के साथ शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक की। इसी दिन अमेरिका के वित्त विभाग ने यह कदम उठाया है।

अमेरिका ने भारत को मुद्रा निगरानी सूची से हटाया, चीन को झटका; जानिए क्या हैं इसके मायने

अमेरिका ने शुक्रवार को भारत समेत चार अन्य देशों को अपनी मुद्रा निगरानी सूची से हटा दिया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कांग्रेस (संसद) को सौंपी अपनी द्विवार्षिक रिपोर्ट में कहा कि भारत, इटली, मैक्सिको, थाईलैंड और वियतनाम को सूची से हटा दिया गया है। इसमें कहा गया है कि जिन देशों को सूची से हटा दिया गया है, वे लगातार दो बार तीन मानदंडों में मुद्रा क्या है और इसके कार्य क्या‌ है से केवल एक को पूरा कर पाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस साल जून में अपने महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष के कारण भारत को करेंसी मैनिपुलेटर की निगरानी सूची में रखा था। महामारी की शुरुआत के बाद से यह तीसरी बार था जब भारत सूची में आया था।

क्या है मुद्रा निगरानी सूची?

भारत पिछले दो साल से अमेरिकी मुद्रा निगरानी सूची में था। अमेरिका अपने प्रमुख भागीदारों की मुद्रा पर निगरानी के लिए यह लिस्ट तैयार करता है। इस व्यवस्था के तहत प्रमुख व्यापार भागीदारों की मुद्रा को लेकर गतिविधियों तथा वृहत आर्थिक नीतियों पर करीबी नजर रखी जाती है।

भारत यात्रा पर हैं अमेरिकी वित्त मंत्री

बता दें कि अमेरिका ने भारत को अपनी मुद्रा निगरानी सूची से ऐसे समय में हटाया है जब उसकी वित्त मंत्री भारत के दौरे पर हैं। अमेरिका की वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने अपनी भारत यात्रा के साथ शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक की। इसी दिन अमेरिका के वित्त विभाग ने यह कदम उठाया है।

चीन को झटका

वित्त विभाग ने संसद को अपनी छमाही रिपोर्ट में कहा कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, मलेशिया, सिंगापुर और ताइवान सात देश हैं जो मौजूदा निगरानी सूची में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों को सूची से हटाया गया है उन्होंने लगातार दो रिपोर्ट में तीन में से सिर्फ एक मानदंड पूरा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने विदेशी विनिमय हस्तक्षेप को प्रकाशित करने में विफल रहा है। इसके अलावा चीन अपनी विनिमय दर तंत्र में पारदर्शिता की कमी के चलते वित्त विभाग की नजदीकी निगरानी में है।

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